उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय सेवा निदेशालय ने किया “क्षमता वर्धन कार्यशाला” का आयोजन

देहरादून। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय सेवा निदेशालय द्वारा विश्वविद्यालय परिसर, देहरादून में गढ़वाल क्षेत्र के अध्ययन केन्द्रों के लिए “क्षमता वर्धन कार्यशाला” का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाना, अध्ययन केन्द्रों के संचालन को सुदृढ़ करना तथा मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा प्रणाली को जन-जन तक पहुँचाना रहा।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं कुलगीत के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड राज्य उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र भसीन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, मीडिया सलाहकार समिति, उत्तराखंड सरकार के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह तथा पूर्व निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. सविता मोहन विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।
मुख्य अतिथि डॉ. देवेंद्र भसीन ने विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि आने वाला समय मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा का है। उन्होंने विश्वविद्यालय को इंडस्ट्रीदृअकादमिक सहयोग के क्षेत्र में और प्रभावी कार्य करने के सुझाव दिए।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने विश्वविद्यालय की वर्तमान शैक्षिक गतिविधियों, उपलब्धियों तथा भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय रोजगार की आवश्यकता के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार कर रहा है तथा रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर इंडस्ट्रीयल अकादमिया सेल का गठन किया गया है, जो विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से समन्वय स्थापित कर भविष्य की योजनाओं पर कार्य कर रहा है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. गोविंद सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा अत्यंत प्रभावशाली भूमिका निभा रही है। उन्होंने ब्रिटिश मुक्त विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि वह शोध के क्षेत्र में ऑक्सफोर्ड जैसी विश्वविद्यालयों को भी चुनौती देता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय भी शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर सकता है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. सविता मोहन ने शिक्षा व्यवस्था एवं शिक्षकों के दायित्वों पर विशेष बल देते हुए कहा कि यदि शिक्षक गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रदान करेंगे तो विद्यार्थी स्वाभाविक रूप से संस्थान से जुड़ेंगे तथा प्राप्त शिक्षा का उपयोग स्वयं और समाज के विकास में करेंगे।