चार धाम यात्रा 2026 के पहले महीने में 2025 की तुलना में 3.7% कम श्रद्धालु पहुंचे: एसडीसी फाउंडेशन का विश्लेषण

देहरादून: देहरादून स्थित सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज़ फाउंडेशन द्वारा जारी तुलनात्मक विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2026 की जारी चार धाम यात्रा के पहले महीने में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या में 3.7% की कमी दर्ज की गई है।

विश्लेषण के अनुसार, 19 अप्रैल से 18 मई 2026 के बीच केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में कुल 16,43,182 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इसके मुकाबले, वर्ष 2025 की यात्रा अवधि के पहले महीने में 17,07,011 श्रद्धालु चार धाम पहुंचे थे। इस प्रकार इस वर्ष 63,829 श्रद्धालुओं की कमी दर्ज की गई है।

चारों धामों में से केदारनाथ में श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि देखने को मिली। वर्ष 2026 के पहले महीने में केदारनाथ में 6,65,140 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 6,49,161 थी। इस वर्ष कुल चार धाम यात्रा में केदारनाथ की हिस्सेदारी 40.5% रही, जबकि 2025 में यह 38% थी।

हालांकि, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में पिछले वर्ष की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या में हल्की कमी दर्ज की गई। बद्रीनाथ में इस वर्ष 4,28,973 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि 2025 में यह संख्या 4,57,409 थी। वहीं गंगोत्री और यमुनोत्री में भी मध्यम गिरावट दर्ज की गई।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 55,000 श्रद्धालु चार धामों में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। यदि अगले पांच से छह सप्ताह तक यह रुझान जारी रहता है और ऊर्जा संकट, अत्यधिक मानसूनी घटनाओं या किसी बड़ी आपदा जैसी कोई बड़ी बाधा उत्पन्न नहीं होती है, तो जून 2026 के अंत तक कुल श्रद्धालुओं की संख्या 35 से 40 लाख के बीच पहुंच सकती है। वर्ष 2025 में 30 जून तक केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री एवं हेमकुंड साहिब में कुल 37,21,169 श्रद्धालु पहुंचे थे।

18 मई 2026 की राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की प्रातःकालीन रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान यात्रा के दौरान अब तक 55 श्रद्धालुओं की मृत्यु दर्ज की गई है। इनमें केदारनाथ में 30, बद्रीनाथ में 10, यमुनोत्री में 8 और गंगोत्री में 7 मौतें शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यात्रा के पहले महीने में चार धाम क्षेत्रों में कुल 1,47,453 वाहन पहुंचे हैं।

इन निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए फाउंडेशन के अनूप नौटियाल ने कहा, “चार धाम यात्रा देश की सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक यात्राओं में से एक है। स्थानीय अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक दृष्टि से श्रद्धालुओं की संख्या महत्वपूर्ण अवश्य है, लेकिन पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में ‘कैरींग कैपेसिटी’ सिद्धांतों को अपनाने पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।”

उन्होंने आगे कहा, “केदारनाथ की ओर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और प्रतिदिन भारी मात्रा में हो रही आवाजाही यह दर्शाती है कि यात्रा सीजन के दौरान दीर्घकालिक योजना, भीड़ प्रबंधन, परिवहन व्यवस्था और सुरक्षा तैयारियों को प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है।”

अनूप नौटियाल ने कहा कि यात्रा प्रबंधन को बेहतर बनाने और तैयारियों को मजबूत करने के लिए डेटा-आधारित विश्लेषण और नियमित निगरानी अत्यंत महत्वपूर्ण है। फाउंडेशन पिछले कई वर्षों से चार धाम यात्रा, जलवायु घटनाओं, आपदाओं, कचरा प्रबंधन और उत्तराखंड में ट्रैफिक मोबिलिटी के पैटर्न पर लगातार अध्ययन करता रहा है। संस्था लगातार चार धाम यात्रा के सतत एवं टिकाऊ प्रबंधन की वकालत करती रही है तथा राज्य में पर्यटन और तीर्थयात्रा के रिकॉर्ड बनाने की अत्यधिक प्रवृत्ति पर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाती रही है।