राज्यपाल ने छठे ‘लोक संवर्धन पर्व’ में किया प्रतिभाग

देहरादून: राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने बुधवार को परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित छठे ‘लोक संवर्धन पर्व’ में प्रतिभाग किया। 17 जुलाई तक आयोजित होने वाले इस महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकार, हस्तशिल्पी, लोक कलाकार, उद्यमी अपनी पारंपरिक कला, शिल्प एवं स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। महोत्सव में 150 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें उत्तराखण्ड की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प एवं स्थानीय उत्पादों को विशेष स्थान दिया गया है।

राज्यपाल ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर शिल्पकारों एवं उद्यमियों से उनके उत्पादों, कार्यप्रणाली तथा विपणन संबंधी जानकारी प्राप्त की। उन्होंने महोत्सव में आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का अवलोकन किया तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया।

इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि लोक संवर्धन पर्व केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता, लोक परंपराओं और सृजनशीलता का उत्सव है। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध एवं विविधतापूर्ण है। देश में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर भाषा, लोकगीत, लोकसंगीत, खान-पान और परंपराओं में परिवर्तन देखने को मिलता है, जो हमारी सांस्कृतिक शक्ति का परिचायक है।

राज्यपाल ने कहा कि इस महोत्सव ने देशभर के शिल्पकारों, कलाकारों और उद्यमियों को अपनी प्रतिभा एवं उत्कृष्टता प्रदर्शित करने का प्रभावी मंच प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रतिभागी का कौशल, समर्पण और नवाचार यह सिद्ध करता है कि पारंपरिक कला एवं हस्तशिल्प न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं, बल्कि उन्हें आजीविका और आर्थिक सशक्तीकरण का सशक्त माध्यम भी बनाया जा सकता है।

उन्होंने विशेष रूप से उत्तराखण्ड की महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कार्यकुशलता, परिश्रम और आत्मनिर्भरता पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों ने स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और उन्होंने स्वयं उनके उत्कृष्ट कार्यों को निकट से देखा है।

राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में पारंपरिक कौशल के साथ डिजिटलीकरण और आधुनिक विपणन व्यवस्था को अपनाना आवश्यक है। इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध होगा और शिल्पकारों की आय में वृद्धि होगी। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि महोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में स्टॉलों के माध्यम से उल्लेखनीय व्यापार हुआ, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए उत्साहजनक संकेत है।

उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। ऐसे में युवाओं, शिल्पकारों और उद्यमियों को अपने कौशल एवं जुनून को आर्थिक अवसरों में परिवर्तित करने की दिशा में निरंतर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि आज देश की सोच बदल रही है और स्थानीय उत्पादों तथा स्वदेशी उद्यमों को नई पहचान मिल रही है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, दायित्वधारी बलजीत सोनी, डॉ. सुरजीत सिंह गांधी, शादाब शम्स, पुनीत मित्तल, श्याम अग्रवाल, विश्वास डावर एवं अल्पसंख्यक कल्याण के विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते सहित निदेशक  दीप्ति सिंह एवं अन्य सदस्य उपस्थित रहे।