सरकारी जमीनों की मनमानी बिक्री का सवाल ही नहीं, रोजगार और राजस्व बढ़ाना लक्ष्य : आर. मीनाक्षी सुंदरम

देहरादून। उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) को लेकर विभिन्न स्तरों पर उठाए जा रहे सवालों और प्रचारित की जा रही भ्रामक जानकारियों पर सरकार ने कड़ा पलटवार किया है। प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य सरकारी भूमि की मनमानी बिक्री या परिसंपत्तियों का अनियंत्रित हस्तांतरण करना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का योजनाबद्ध और उत्पादक उपयोग कर निवेश, रोजगार तथा राजस्व में वृद्धि करना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यूआईआईडीबी के माध्यम से परिसंपत्ति मौद्रीकरण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए कुछ चुनिंदा भूमि खंडों को चिह्नित किया गया है। इसके विपरीत बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों को योजना में शामिल किए जाने का जो प्रचार किया जा रहा है, वह वास्तविक तथ्यों के अनुरूप नहीं है।

प्रमुख सचिव ने कहा कि इस विषय पर पूर्व में भी तथ्यों के साथ जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद कई ऐसी जमीनों और परिसंपत्तियों का उल्लेख किया जा रहा है, जिनका वर्तमान प्रस्तावों से कोई संबंध नहीं है। ऐसे में प्रदेश की जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है।

प्रमुख सचिव ने बताया कि राज्य की आर्थिक गतिविधियों को गति देने और अर्थव्यवस्था को अगले स्तर तक ले जाने के उद्देश्य से पूर्व में विस्तृत अध्ययन कराया गया था। इसमें सरकारी भूमि के बेहतर उपयोग के माध्यम से नई आर्थिक गतिविधियां विकसित करने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और राज्य के राजस्व में वृद्धि की संभावनाओं पर विचार किया गया।

उन्होंने कहा कि इसी प्रक्रिया के तहत कुछ चुनिंदा भूमि खंडों को चिह्नित किया गया है। वर्तमान में इनकी संख्या सीमित है। आगामी दो से तीन माह के भीतर लगभग छह से सात चयनित भूमि खंडों की बोली प्रक्रिया आगे बढ़ाने का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि यह पहल राज्य में निवेश आकर्षित करने और आर्थिक संभावनाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भूमि का उपयोग निर्धारित प्रक्रिया और सक्षम स्तर पर अनुमोदन के बाद ही किया जाएगा।

प्रमुख सचिव ने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। धार्मिक पर्यटन, प्राकृतिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन और आरोग्य पर्यटन के विस्तार से राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित आतिथ्य निवेश से लगभग सात से आठ हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं, इससे जुड़ी सहायक आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से 10 से 15 हजार लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।