देहरादून। भारत की जनगणना-2027 के अंतर्गत उत्तराखंड के हिमाच्छादित एवं अत्यंत दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में संचालित विशेष जनगणना अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। राज्य की चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों एवं प्रतिकूल मौसम के बावजूद तैनात जनगणना कार्मिकों ने अपने-अपने निर्धारित क्षेत्रों में घर-घर जाकर 100 प्रतिशत आंकड़ों का संग्रहण पूर्ण कर लिया है। यह विशेष अभियान उत्तराखंड के चार प्रमुख हिमाच्छादित सीमांत जिलों चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग एवं पिथौरागढ़ के अंतर्गत आने वाले 131 हिमाच्छादित गांवों तथा 3 प्रमुख नगर निकायों बद्रीनाथ, केदारनाथ एवं गंगोत्री में संचालित किया गया।
इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य हेतु कुल 182 प्रशिक्षित कार्मिकों को मैदान में उतारा गया था, जिनमें 139 प्रगणक और 43 पर्यवेक्षक शामिल थे। सभी निर्धारित चार्जों के साथ-साथ श्स्पेशल चार्जेजश् के 31 ब्लॉकों में भी जनगणना कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। स्व-गणना को बढ़ावा अभियान के दौरान स्थानीय नागरिकों ने डिजिटल माध्यम से श्स्व-गणनाश् प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर भाग लिया। साथ ही, घर-घर पहुँचे प्रगणकों को भी पूर्ण सहयोग प्रदान किया।
पुनरीक्षण चरण प्रगणना चरण के सफल समापन के बाद अब 01 अक्टूबर से 05 अक्टूबर तक पुनरीक्षण चरण आयोजित किया जाएगा। इस दौरान दर्ज किए गए आंकड़ों का सत्यापन कर आवश्यक संशोधन किए जाएंगे, ताकि अंतिम डेटा की पूर्ण शुद्धता सुनिश्चित की जा सके। जनगणना कार्य निदेशालय (गृह मंत्रालय, भारत सरकार), उत्तराखंड द्वारा राज्य सरकार, जिला प्रशासन एवं स्थानीय निकायों के समन्वय से इस दुर्गम अभियान को समयबद्ध तरीके से पूरा किया गया। निदेशालय ने स्पष्ट किया कि यह आंकड़े केवल संख्यात्मक संग्रहण नहीं हैं, बल्कि यह भविष्य की विकास योजनाओं, अवस्थापना विकास, जनकल्याणकारी नीतियों एवं रणनीतिक विकास का आधार बनेंगे। जनगणना कार्य निदेशालय, उत्तराखंड ने इस राष्ट्रीय कार्य को सफल बनाने के लिए सभी नागरिकों, जिला प्रशासनों, स्थानीय निकायों एवं समर्पित प्रगणकों के प्रति आभार व्यक्त किया है।
