नीट पर सदन से भागने के बजाय बहस में भाग ले राहुलः उनियाल

देहरादून। भाजपा ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर गृह मंत्री अमित शाह के जबाब और छात्रों के मुद्दों पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया है। पार्टी मुख्यालय मे पत्रकारों से वार्ता करते हुए कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गाँधी अराजक और दोहरी राजनीति से देश का माहौल खराब करने के प्रयास में है। वे झारखंड में सरकार के सहयोगी बन, वहां बच्चों पर हुए अत्याचार करते हैं और जंतर मंतर के मुद्दे पर मांगी बहस से खुद ही डर जाते हैं। उन्होंने आग्रह कि राहुल गांधी को डर कर भागने केए बजाय छात्रों के मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए।
उनियाल ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व मे कांग्रेस पार्टी देश का माहौल खराब करने का प्रयास कर रही है। लगातार 12 वर्षों से जनता द्वारा फ्लॉप करने के चलते कांग्रेसी युवराज पूरी तरह बौखलाए हुए हैं। उनके नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की हार का सिलसिला समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है। यही वजह है कि राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष की सभी मर्यादाओं और परंपरा को तोड़ते हुए नकारात्मक एवं अराजक राजनीति पर उतर आए हैं। उनके द्वारा झूठ बोल-बोल कर पूरी तरह से देश की जनता को गुमराह करने का जो प्रयास किया जा रहा है वह बेहद निंदनीय है। नेता प्रतिपक्ष जैसे पद पर विराजित एक व्यक्ति को यह कतई शोभा नहीं देता है।
उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी ने पहले शुरुआत की कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दे और उसको लेकर के लगातार संसद में गतिरोध पैदा किया गया। जब शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया तो कहा कि अब नीट पर चर्चा की जाए और जब संसद में चर्चा की बात आई, तो राहुल गांधी वहां से भाग खड़े हुए हैं । उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि जिस तरह दिल्ली के अंदर राहुल ने छात्रों को उकसाने का काम किया और जिस तरह से अभद्र भाषा का उपयोग प्रधानमंत्री  सहित तमाम नेताओं के लिए किया गया वह अफसोसजनक है। यह निश्चित रूप से भारतीय संसदीय इतिहास में बहुत ही शर्मनाक और गंभीर मसला है। विपक्ष का संसद में 15 दिनों का गतिरोध और लगातार यह कहना कि नीट पर चर्चा कराओ और जब नीट पर चर्चा करने को सरकार तैयार हुई, तो फिर झूठा बहाना लेकर भाग खड़े हुए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कल तो उन्होंने सारी मर्यादा को ही तोड़ दिया, जब उन्होंने कहा कि दिल्ली के छात्र आंदोलन में गोली चली। मतलब उस आंदोलन के इतने दिनों के बाद अगर नेता प्रतिपक्ष एक सनसनी पैदा करने के लिए इस तरह की बातें करे, तो निश्चित रूप से संसदीय इतिहास में यह बेहद निंदनीय है और गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। छात्रों के इस पूरे प्रकरण को सरकार ने बेहद गंभीरता एवं संवेदनशीलता से लिया तथा नीट की परीक्षा रद्द कर महीने भर में दोबारा परीक्षा हुई और परिणाम निकला। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ और कठोरतम नकल कानून चंद दिनों में बनाया और संसद से पास कराया। हालांकि हमारा सौभाग्य है कि हमारे राज्य ने सबसे पहले उस नकल पर एक बड़े कठोर कानून को बनाया था। लेकिन आज पूरे देश में परीक्षाओं में इस तरह की बदइंतजामी न हो, परीक्षाओं में इस तरह की कोई आदमी गुस्ताखी न कर सके, तो फिर एक सख्त कानून बनाने का काम केंद्र सरकार ने किया।
उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि डरो मत भागो मत, भागते क्यों हैं, आइए चर्चा में भाग लीजिए क्योंकि सरकार हर चीज का जवाब देने को तैयार है। एक तरफ वह छात्रों के हित की आड़ में संसद की गरिमा गिराने की बात करते हैं। उनके हितैषी के रूप में दिखने का स्वांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर झारखंड में जो हुआ, उसे देश ने देखा है। सब लोगों के सामने है, झारखंड में क्या हुआ। कंटीले तार तक बिछा दिए गए बच्चों के लिए और बच्चों के साथ निर्ममता दिखाई गई। जबकि झारखंड के बच्चों का आंदोलन भी सबने देखा होगा, कोई अभद्रता और अश्लीलत बच्चों द्वारा नहीं हुई। ऐसी स्थिति में, जहाँ पर कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा की आपस की सरकार है, वहाँ पर आवाज भी मुँह से नहीं निकल रही है। एक शब्द प्रतिक्रिया का नहीं निकला कि गलत हो रहा है। वहां छात्रों पर जिस तरह कोई आतंकवादी हो, कंटीले तार बिछाकर उनको रोकने का प्रयास करना, यह कांग्रेस और उनके सहयोगियों के दोहरे चरित्र को बहुत स्पष्ट दिखाता है। इस अवसर कर प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेंद्र बिष्ट, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चैहान, सह मीडिया प्रभारी राजेंद्र नेगी, प्रदेश प्रवक्ता कमलेश रमन भी उपस्थित रहे।