देहरादून। उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण एवं जीवन से जुड़े गंभीर मामलों का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। आयोग के संज्ञान में एक ऐसा मामला आया है, जिसमें *माता की मृत्यु हो चुकी है तथा पिता के जेल में होने के कारण तीन बच्चे असहाय एवं अभिभावकीय संरक्षण से वंचित हो गए हैं।* मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग द्वारा जिला बाल कल्याण समिति एवं जिला प्रोबेशन अधिकारी को पत्र प्रेषित कर बच्चों की तत्काल सुरक्षा एवं संरक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि तीनों बच्चों की स्थिति का समुचित आकलन करते हुए उनके *सर्वोत्तम हित, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं भावनात्मक आवश्यकताओं* को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास की उचित व्यवस्था की जाए। साथ ही, यदि परिवार में कोई सक्षम एवं उपयुक्त रिश्तेदार/अभिभावक उपलब्ध हो तो नियमानुसार सत्यापन कर बच्चों के पारिवारिक पुनर्वास की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए। बच्चों को पात्रतानुसार सरकारी योजनाओं एवं सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से जोड़ने के निर्देश भी दिए गए हैं।
### *ICU में ऑक्सीजन आपूर्ति बाधित होने पर व बच्चा बदलने पर आयोग ने मांगी रिपोर्ट*
वहीं, एक मेडिकल कॉलेज के ICU में भर्ती बच्चों से संबंधित एक अन्य गंभीर मामले का भी आयोग ने संज्ञान लिया है। प्राप्त सूचना के अनुसार *अचानक विद्युत आपूर्ति बाधित होने के कारण ICU में ऑक्सीजन आपूर्ति प्रभावित हो गई और ऑक्सीजन समाप्त होने की स्थिति उत्पन्न हो गई।* आपात स्थिति में चिकित्सकों द्वारा *Ambu Bag* के माध्यम से बच्चों को कृत्रिम रूप से ऑक्सीजन देकर उनकी जान बचाई गई। साथ ही बच्चा बदलने के आरोप की पूर्णतः निष्पक्ष जांच की आख्या मांगी है
आयोग ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को पत्र भेजकर *तलब किया है तथा घटना की विस्तृत तथ्यात्मक आख्या एवं स्पष्टीकरण मांगा है।* आयोग ने विद्युत आपूर्ति बाधित होने के कारण, ऑक्सीजन बैकअप की उपलब्धता, घटना की अवधि, उस समय ICU में भर्ती बच्चों की संख्या तथा आपातकालीन स्थिति में अपनाई गई व्यवस्था सहित विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि *ICU में भर्ती बच्चों के लिए निर्बाध ऑक्सीजन एवं विद्युत आपूर्ति जीवनरक्षक व्यवस्था का हिस्सा है।* ऐसी घटना की पुनरावृत्ति बच्चों के जीवन के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकती है। इसलिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन को भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त एवं प्रभावी बैकअप व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने कहा कि *बच्चों की सुरक्षा और जीवन से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।* बच्चों से संबंधित प्रत्येक संवेदनशील प्रकरण में आयोग द्वारा आवश्यकतानुसार तत्काल हस्तक्षेप करते हुए संबंधित विभागों एवं अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
